चाहत….डा श्याम गुप्त की गज़ल…..

डा श्याम गुप्त की ग़ज़ल…

तुमको देखा तुमको जाना तुमको चाहा ज़ाना।
जानकर आपको कुछ और नहीं जाना, ज़ाना। 

आपकी चाह में कुछ और की चाहत न रही,
तेरी चाहत को ही पूजा और पूजा जाना।

चाह में आपकी चाहत का मिला सारा जहां,
चाह का एसा असर चाह के तुमको जाना ।

चाह में दर्द ही चाहत का सुकूँ बन जाए,
चाहकर आपको चाहत को यूं जाना, ज़ाना ।

ज़िक्र तेरा, तेरी चाहत का श्याम’ होगा जब जब,
दर्दे-दिल, दर्दे-सुकूँ का भी बयाँ होगा ज़ाना

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