मेरे देश में कोई भूखा नहीं…

मेरे देश में,

अब कोई भूख से नहीं मरता;

क्योंकि, अब-

देश में बडे बडे बिज़नेस स्कूल हैं,

शाही ठाठ बात से सज़े, आई आई एम व

बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हैं;

जो अरबों कमाती हैं, और-

उनके कर्मचारी भी लाखों पाते हैं ।

सरकाआरी कर्मचारी तो ,

सिर्फ़ ड्यूटी पर विदेश जाते हैं;

ये काम तो देश में करते हैं, पर-

पुरस्कार लेने मलयेशिया जाते हैं।


मेरे देश की चमचमाती सडकों पर, प्रतिपल-

तमाम कार, स्कूटर, व टेक्सियां फ़र्राटा भरतीं हैं; और–

पटरियों पर, वातानुकूलित शताब्दी,

राजधानी एक्स्प्रेस व मैट्रो दौडती हैं।


मेरे देश मे अब-

बडे बडे ’मौल ’ सुपर बाज़ार व,

बहुमन्ज़िली इमारतों का मेला है।

हर जगह कोल्ड ड्रिन्क्स, ठन्डा, काफ़ी,

फ़ास्ट फ़ूड,पिज़्ज़ा , बर्गर, आइसक्रीम, व-

ब्रान्डेड आइटम का रेलम पेला है।

टी वी, रडियो, केबुल पर-

आइटम सोन्ग, आइटम डान्स, व-

आइटम कन्याओं का ठेलम ठेला है।


यहां हर गली में ’गुरू’ हैं

हर कोई किसी न किसी का

चमचा या चेला है ।


भूखा वही मरता है,

जो हठेला है,

शान्त स्वाधीन अकेला है,

जुबान का करेला है,

जिसका न कोई गुरू-

न चमचा न चेला है ॥


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One Response to “मेरे देश में कोई भूखा नहीं…”

  1. बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति , बधाई।

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