अगस्त, 2010 के लिए पुरालेख

karm abhinandan—poem

Posted in बिना श्रेणी on अगस्त 6, 2010 by drsbg

मेरे देश में कोई भूखा नहीं…

Posted in literature on अगस्त 6, 2010 by drsbg

मेरे देश में,

अब कोई भूख से नहीं मरता;

क्योंकि, अब-

देश में बडे बडे बिज़नेस स्कूल हैं,

शाही ठाठ बात से सज़े, आई आई एम व

बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हैं;

जो अरबों कमाती हैं, और-

उनके कर्मचारी भी लाखों पाते हैं ।

सरकाआरी कर्मचारी तो ,

सिर्फ़ ड्यूटी पर विदेश जाते हैं;

ये काम तो देश में करते हैं, पर-

पुरस्कार लेने मलयेशिया जाते हैं।


मेरे देश की चमचमाती सडकों पर, प्रतिपल-

तमाम कार, स्कूटर, व टेक्सियां फ़र्राटा भरतीं हैं; और–

पटरियों पर, वातानुकूलित शताब्दी,

राजधानी एक्स्प्रेस व मैट्रो दौडती हैं।


मेरे देश मे अब-

बडे बडे ’मौल ’ सुपर बाज़ार व,

बहुमन्ज़िली इमारतों का मेला है।

हर जगह कोल्ड ड्रिन्क्स, ठन्डा, काफ़ी,

फ़ास्ट फ़ूड,पिज़्ज़ा , बर्गर, आइसक्रीम, व-

ब्रान्डेड आइटम का रेलम पेला है।

टी वी, रडियो, केबुल पर-

आइटम सोन्ग, आइटम डान्स, व-

आइटम कन्याओं का ठेलम ठेला है।


यहां हर गली में ’गुरू’ हैं

हर कोई किसी न किसी का

चमचा या चेला है ।


भूखा वही मरता है,

जो हठेला है,

शान्त स्वाधीन अकेला है,

जुबान का करेला है,

जिसका न कोई गुरू-

न चमचा न चेला है ॥