.डा श्याम गुप्त की कविता –सृष्टि को आगे बढाने का क्रम—?.

.—- पिता-पुत्र का दायित्व — यह सच है कि ,ईश्वर ने- सृष्टि को आगे बढाने का बोझ , नारी पर डाल दिया, पर- पुरुष पर भी तो….. | अंततः कब तक एक पिता ,बच्चों को- उंगली पकड़ कर चलाता रहेगा | बच्चा स्वयं अपना दायित्व निभाये, उचित,शाश्वत,मानवीय मार्ग पर चले, चलाये; अपने पिता के सच्चे पुत्र होने का , दायित्व निभाये | आत्मा से परमात्मा बनने का, अणु से विभु होने का हौसला दिखाए; मानव से ईश्वर तक की यात्रा पूर्ण करने का, जीवन लक्ष्य पूर्ण कर पाए , मुक्ति राह पाजाये | पर नर-नारी दोनों ने ही , अपने-अपने दायित्व नहीं निभाये ; फैशन, वस्त्र उतारने की होड़ , पुरुष बनने की इच्छा रूपी नारी दंभ , गर्भपात, वधु उत्प्रीणन ,कन्या अशिक्षा, दहेज़ ह्त्या,बलात्कार,नारी शोषण से- मानव ने किया है कलंकित – अपने पिता को,ईश्वर को , और– करके व्याख्यायित आधुनिक विज्ञान, कहता है अपने को सर्व शक्तिमान , करता है ईश्वर को बदनाम ||

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