नश्वर जीवन —-

नश्वर जीवन का अभिनन्दन,
अटल मृत्यु पर करुणा  क्रंदन |
कर्म लीन नर भला करे क्यों,
अमर आत्मा भला डरे क्यों |

जीवन भी वह ही देता है,
जीवन भी वह ही लेता है |
देने वाला लेलेता है,
अमर अनश्वर भला डरे क्यों |

ना जीवन का अभिनन्दन हो,
ना ही क्रंदन करें मृत्यु  का |
होगा जैसा काल गति करे,
चलता है निर्देश उसी का |

हम अभिनन्दन करें सत्य का,
सत्य कर्म में बसता है |
जो अभिनन्दन करे कर्म का,
उसमें ईश्वर बसता है |

सत्य मौन से भी विशिष्ट है,
सत्य जान क्यों मौन रहे  ?
जो न कह सके सत्य उठा सर,
उसको मानव कौन कहे  ?

चाहे जितना पथिक थको तुम,
बार-बार फिर यत्न करो  |
विजय श्री की चाहत है तो,
पुनः कर्म आरम्भ करो |

अपना-अपना कार्य लगन से,
जो    नर  करते रहते हैं  |
दूर रहें या पास रहें वो,
लोगों में प्रिय रहते हैं |

सुख-दुःख की यह इच्छा ही तो ,
जीवन, बैभव, मुक्ति बने |
दुःख आया सुख भी आयेगा,
परम आत्मा भला डरे क्यों ||

 

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2 Responses to “नश्वर जीवन —-”

  1. विवेक बाजपेयी Says:

    मर्मस्पर्शी कविता , साधुवाद स्वीकार करे

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