गीत व कविता वस्तुतः मन की गहराई से निस्रत होते हैं , जीवन एक गीत ही है , जीवन व आयु के विभिन्न सोपानों परउठते हुए विभिन्न भावों को सहेज़ते हुएमन के भाव- गीतों के विभिन्न रूप भाव निसृत होते हैं उसी के भावानुसार ही गीतनिसृत होते हैं, इन गीत भावों को प्रत्येक मन , मानव ,व्यक्तित्व अपने जीवन में अनुभव करता है, जीता है , बस कवि उन्हेंमानस की मसि में डुबो कर कागज़ पर उतार देता है ; देखिये कैसे –)
गीत बन गए

दर्द बहुत थे ,भुला दिए सब ,
भूल न पाये ,वे बह निकले –
कविता बनकर ,प्रीति बन गए |
दर्द जो गहरे ,नहीं बह सके ;
उठे भाव बन ,गहराई से,
वे दिल की अनुभूति बन गए |

 

दर्द मेरे मन मीत बन गए ,
यूँ मेरे नव-गीत बन गए ||

भावुक मन की विविधाओं से,
बन सुगंध वे छंद बने फ़िर-
सुर लय बन कर गीत बन गए |
भूली-बिसरी यादों के उन,
मंद समीरण की थपकी से
ताल बने संगीत बन गए |—दर्द मेरे….||

सुख के पल छिन जो भी आए,
स्वप्न सुहाने से मन भाये;
प्रणय मिलन के मधुरिम पल में,
तन-मन के मधु-सुख कम्पन बन ;
तनकी भव-सुख प्रीति बन गए,
गति यति बन रस रीति बन गए |—दर्द मेरे ….||

ज्ञान-कर्म के ,नीति-धर्म के,
विविध रूप जब मन में उभरे |
सत् के पथ की राह चले तो ,
जग-जीवन की नीति बन गए |
तन के मन के अलंकार बन,
जीवन की भव -भूति बन गए|—–यूँ मेरे नव …..||

दर्शन भक्ति विराग-त्याग के,
सुख संतोष भाव मन छाये ;
प्रभु की प्रीति के भाव बने तो ,
आनंद सुख अनुभूति बन गए |
आत्मलीन जब मुग्ध मन हुए;
परमानंद विभूति बन गए |—–दर्द मेरे……..||

अप्रमेय अनुपम अविनाशी ,
अगुन अभाव नित विश्व प्रकाशी ;
सत् चित आनंद घट घट बासी ,
अंतस के जब मीत बन गए ;
अमृत घट के दीप जल गए ,
आदि अनाहत गीत बन गए |

दर्द मेरे मन मीत बन गए,
यूँ मेरे नव-गीत बन गए ||

 





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21 Responses to “”

  1. Bahut Barhia…Aapka Swagat Hai… Isi Tarah Likhte Rahiye….

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  2. यही भाव रहे होंगे पंत जी के जब उन्होने लिखा होगा

    उमड़ के आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान

    बधाई..और ब्लॉग जगत पे स्वागत

  3. चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लेखन के द्वारा बहुत कुछ सार्थक करें, मेरी शुभकामनाएं.

    दोस्ती पर उठे हैं कई सवाल- क्या आप किसी के दोस्त नहीं? पधारें- (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

  4. dard bhulane ki cheej nahin hoti.

  5. dard bulane ki cheej nahin hoti.

  6. बहुत अच्छा लेख है। ब्लाग जगत मैं स्वागतम्।

  7. आप का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत मेंपदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको बधाई.
    ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं,.
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  8. dard ki srishti se antarang parichay ke liye badhayee.

  9. अच्छी कविता ।
    कविता में दर्द का एक समंदर नज़र आता है ।
    दर्द इतना बढ गया अन्दर की अब बाहर नज़र आता है ।
    लिखते रहें । शुभकामनाएं ।

  10. सभी को धन्यवाद । -मेरे अन्य ब्लोग—saahityshyam , The world of my thoughts….shyamsmriti… , vijaanaati-vijaanaati-science.blogspot.com

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